Posts

Showing posts from October, 2019

बांग्लादेशः हिंदू युवक के कथित फ़ेसबुक पोस्ट को लेकर बवाल

बांग्लादेश में सोमवार को बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं. इसके एक दिन पहले एक साम्प्रदायिक दंगे में पुलिस की गोली से चार लोगों की मौत हो गई थी. बताया जा रहा है कि भोला द्वीप पर रहने वाले एक हिंदू युवक बिप्लब चंद्र बैद्य की फ़ेसबुक आईडी से एक टिप्पणी की गई थी , जिसमें कथित तौर पर ईश निंदा की गई थी. इसके बाद क़रीब 20 हज़ार लोगों की भीड़ युवक को फांसी देने की मांग कर रहे थे. पुलिस का कहना है कि रविवार को भीड़ के उग्र होने पर उन्हें गोली चलानी पड़ी. इस घटना में चार लोगों की मौत हो गई जबकि 50 लोग घायल हुए हैं जिनमें 10 पुलिसकर्मी शामिल हैं. इलाक़े में भारी तनाव को दे खते हुए एक जगह इकट्ठा होने, रैलियों और प्रदर्शनों पर पाबं दी लगा दी गई है. ये घटना बीते शनिवार को भोला द्वीप के बुरहानुद्दीन शहर की है. वहाँ दो दिन पहले एक हिंदू युवक ने पुलिस को बताया था कि उसका फ़ेसबुक आईडी हैक हो गया है. इसी फ़ेसबुक आईडी से पैगंबर मोहम्मद के संबंध में कुछ आपत्तिजनक पोस्ट किया गया. लेकिन इसी दौरान स्थानीय इस्लामिक और मदरसा संगठन उस हिंदू युवक को सज़ा देने की मांग को लेकर सड़क पर प्रदर्शन करने लगे...

कुर्द अपनी ही ज़मीन पर क्यों हैं तबाह

कुर्दों की जांबाज़ी का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1920 में इराक़ में कुर्दिस्तान की लड़ाई के लिए बने हथियारबंद संगठन का नाम 'पेशमेगा' था जिसका मतलब होता है 'वो लोग जो मौत का सामना करते हैं.' संयुक्त कुर्दिस्तान को लेकर शुरू हुई लड़ाई आज कई संगठनों में बँट चुकी है. अरब, कुर्दिस्तान और उत्तरी अफ़्रीका उस्मानी हुक़ूमत यानी ऑटोमन साम्राज्य का हिस्सा हुआ करते थे. पहले विश्व युद्ध में तुर्की की हार के बाद अलग-अलग देश अस्तित्व में आए जिसके बाद कुर्दिस्तान का इलाक़ा आज सीरि या, इराक़, तुर्की, ईरान और अर्मेनिया जैसे देशों में बंट चुका है. आज इन इलाक़ों में रहने वाले कुर्दों की आबादी तकरीबन साढ़े तीन करोड़ है. इतने इलाक़ों में बँटे कुर्दों का कोई एक केंद्रीय संगठन नहीं है. अलग-अलग देशों में अलग-अलग संगठन कुर्दिस्तान के लिए लड़ रहे हैं. आख़िर इसकी क्या वजह है जो ये सभी संगठन एक मंच पर नहीं आ सके. इस सवाल पर मध्य-पूर्व मामलों के जानकार क़मर आगा कहते हैं कि इसकी सबसे बड़ी वजह इनका अलग-अलग देशों में बँटा होना है. वो कहते हैं, "ये संगठ न अलग-अलग देशों में ...